हाइकमान के मुताबिक हुआ टीम धामी का विस्तार..!
★उत्तराखंड मंत्रिमंडल विस्तार क्या मजबूरी थी ★
●धामी को नापसंद करने वालों की मानी केंद्रीय लीडरशिप ने●
अनिल बहुगुणा
उत्तराखंड में लंबे समय से टले जा रहे मंत्रिमंडल विस्तार को आखिरकार पूरा कर दिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में पांच नए कैबिनेट मंत्रियों को शामिल किया गया है। सूत्रों और पार्टी के अंदरूनी हलकों की मानें तो यह विस्तार ‘मजबूरी’ का था, क्योंकि केंद्रीय लीडरशिप को पार्टी के भीतर धामी को नापसंद करने वाले गुट की मांग माननी पड़ी। पार्टी के अंदर चल रही चर्चा के मुताबिक, इस विस्तार में अनिल बलूनी-त्रिवेंद्र रावत (एबीटीआर) गुट का दबदबा साफ दिखाई दिया। पांच नए मंत्रियों में से चार को एबीटीआर गुट का माना जा रहा है। केवल एक मंत्री को छोड़कर बाकी सभी इस गुट के करीबी बताए जा रहे हैं। नए मंत्रियों में रुद्रप्रयाग के भरत चौधरी को अनिल बलूनी का बेहद करीबी माना जाता है। मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र रावत खेमे के सिपहसलार हैं। खजान दास एबीटीआर गुट के साथ-साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भी करीबी माने जाते हैं। सूत्र बता रहे हैं कि राम सिंह कैडा और भरत चौधरी पिछले लंबे समय से कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ा रहे थे, लेकिन एबीटीआर गुट ने आला कमान तक बात पहुंचाकर इन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करवा लिया और अपना खेमा और मजबूत कर लिया।खास बात यह रही कि अरविंद पांडे को इस बार भी किनारे कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आला कमान को मनाकर अरविंद पांडे को फिलहाल मंत्रिमंडल में शामिल न करने का फैसला करवा लिया। याद रहे, अरविंद पांडे के पिछले नाराजगी वाले एपिसोड में मदन कौशिक और त्रिवेंद्र रावत की अहम भूमिका रही थी।दूसरी ओर, मंत्री पद के प्रबल दावेदार मुन्ना सिंह चौहान और विनोद चमोली इस बार भी खाली हाथ रह गए। संसदीय कार्य में कुशल मुन्ना सिंह चौहान को सूची से डिलीट करवाने के पीछे कुछ खनन माफिया का हाथ होने की भी चर्चा पार्टी में जोरों पर है।पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “केंद्रीय लीडरशिप को पार्टी के भीतर धामी-विरोधी ताकतों की मांग माननी पड़ी। यह विस्तार मजबूरी का था, लेकिन इससे एबीटीआर गुट मजबूत हुआ है।”मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब उत्तराखंड सरकार की नजर आगामी चुनावी तैयारियों और विकास कार्यों पर है। हालांकि पार्टी के अंदरूनी गुटबाजी की खबरें अभी भी सुर्खियों में बनी हुई हैं।




