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अरविंद पांडे प्रकरण को डाइल्यूट करने की कसरत में जुटे धामी

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★गदरपुर विधायक अरविंद पांडेय के ‘वायरल पत्र’ का असर कम करने की कोशिश में धामी★

★प्रदेश अध्यक्ष को दिया जिम्मा। ★ 2027 चुनावों पर असर

*अनिल बहुगुणा*

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। गदरपुर से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय के नाम से सोशल मीडिया पर वायरल एक पत्र ने सत्ताधारी दल के अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है। इस पत्र में कथित तौर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली, राजनीतिक गुटबाजी और परिवार पर लगे मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिससे भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा ये बात सतह पर आ गई है। वायरल हुए इन पत्र को काउंटर करने के लिए या इसकी तपिश कम करने के लिए पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने पार्टी में शामिल समारोह आयोजित कर डाला है।
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में विधायक अरविंद ने पांडेय ने लिखा है कि पिछले चार वर्षों से मुख्यमंत्री उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। इसमें बाजपुर थाने में फर्जी मुकदमे, परिवार पर जमीन कब्जे के आरोप, पुलिस अधिकारियों के माध्यम से बेटे को धमकाने और सुखदेव सिंह नामधारी जैसे नेताओं के जिक्र के साथ अपनी और परिवार की सुरक्षा की चिंता जताई गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस पत्र को आधार बनाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और SIT जांच की मांग की। उन्होंने कहा, “सत्ता पक्ष के विधायक को ही इतनी शिकायत करनी पड़ रही है तो आम जनता की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी?” इस लेटर बम की आवाज को दबाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष तैनात कर दिया। आननफानन में प्रदेश अध्यक्ष ने काउंटर में दो महिला कांग्रेस नेताओं को भाजपा में शामिल करने का इवेंट आयोजित कर दिया ताकि पत्र का असर सोशियल मीडिया पर कम हो सके। प्रधानमंत्री को मुख्यमंत्री वाले शिकायती पत्र पर अरविंद पांडेय की चुप्पी या स्पष्ट प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है, जिससे सस्पेंस और बढ़ गया है। कुछ सूत्रों के अनुसार, विधायक जल्द मीडिया से रूबरू हो सकते हैं। यह घटना पांडेय के लंबे समय से चले आ रहे असंतोष की कड़ी मानी जा रही है। यह घटना BJP के भीतर तराई क्षेत्र (ऊधम सिंह नगर) में असंतोष की ओर ईसरा करती है। अरविंद पांडेय एक प्रभावशाली नेता हैं और उनका गदरपुर सीट पर मजबूत आधार है। यदि असंतोष गहराया तो अंदरूनी गुटबाजी बढ़ सकती है। पूर्व CM त्रिवेंद्र सिंह रावत,डॉ धन सिंह,सांसद अनिल बलूनी,ऋतु भूषण समेत अन्य असंतुष्ट नेताओं के साथ गठजोड़ की अटकलें पहले से ही खबरों में है।
विपक्ष इस मुद्दे को भुनाकर BJP की “एकता” पर सवाल उठा रहा है था कि भाजपा ने एक तराई और एक गढ़वाल इलाके की महिला नेताओं को तोड़ कर अपने पक्ष में कर दिया।
हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पहले ही धामी को 2027 का चेहरा घोषित कर दिया है, इसलिए पार्टी इसे “आंतरिक मामला” बताकर निपटाने की कोशिश करेगी। उत्तराखंड में 2027 के चुनाव नजदीक हैं। गदरपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर अगर BJP का वोट बटा या पांडेय जैसे नेता नाराज रहे तो तराई क्षेत्र (जहां विकास, भूमि और कानून-व्यवस्था बड़े मुद्दे हैं) में पार्टी को नुकसान हो सकता है। कांग्रेस पहले से ही “धामी सरकार की विफलता” का नैरेटिव चला रही है। कुछ जानकर कहते हैं, एक विधायक की नाराजगी अकेले चुनाव नहीं पलटेगी, लेकिन अगर यह ट्रेंड बना तो BJP की ‘एकता और विकास’ की छवि को धक्का लग सकता है।” वहीं, BJP कार्यकर्ता उम्मीद जताते हैं कि संगठनात्मक प्रयासों से सब ठीक हो जाएगा। अभी के लिए, यह पत्र उत्तराखंड की सियासत का नया ‘लेटर बम’ बन गया है। सच्चाई सामने आने तक बहस जारी रहेगी। क्या अरविंद पांडेय भाजपा के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे या नया रास्ता चुनेंगे?

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