भाजपा की अंतर्कलह से उपजेंगे नए राजनीतिक समीकरण:आलेख-डॉ योगेश धस्माना
*डॉ योगेश धस्माना*
वरिष्ठ पत्रकार
उत्तराखंड में बीजेपी की ट्रिपल इंजन के सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर डिरेल होने की खबरों के चलते नई रणनीति बनाने में जुट गई है।
दल के भीतर वर्चवश की लड़ाई हाल ही में भगत सिंह कोश्यारी के द्वारा अनिल बलूनी पर किए गए कटाक्ष के बाद क्षेत्रवाद की ओर चल पड़ी हैं।गढ़वाल और कुमाऊं की राजनीति का एक वर्ग धामी सरकार के विरुद्ध राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गया हैं।
उत्तराखंड में भाजपा इस समय विपक्ष से अधिक दल के भीतर निष्ठावान कार्यकर्ताओं के बीच पनपते असंतोष को डैमेज कंट्रोल करने के उद्देश्य से अब नारी वंदन योजना को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाने की ओर दिखाई दे रहे हैं।इस योजना के तहत बीजेपी का संगठन बागी प्रत्याशियों की संभावनाओं को देखते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को चुनावी मैदान में उतार कर खेला करने पर जुट गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसा करके भाजपा दल के भीतर और विपक्ष को संभलने का मौका भी नहीं देगी।
बंगाल की जीत के बाद उत्साह से लबरेज बीजेपी विधान सभा चुनावों में महिलाओं को 25 प्रतिशत आरक्षण देकर चुनाव जीतने पर किसी महिला प्रत्याशी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर सकती है। यह चेहरा वर्तमान राजनीति में सक्रिय महिलाओं से हट कर भी हो सकता है।
साल भर चुनावी मोड मोड पर रहने वाली भाजपा अब राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम शुरू करने वाली है।एक बार फिर तराई और झुग्गी झोपड़ियों पर रहने वाली जनता को अपना वोट बचाने के लिए अनेक प्रमाणपत्रों को जुटाना कठिन होगा। इसका लाभ भाजपा भी परोक्ष रूप से अपने पक्ष में कर सकती है।
विपक्ष यदि सत्ता को चुनौती देने में एक जुट हो सके तो तब ही,संघर्ष उनके पक्ष में सफ़ल हो सकता हे।और यदि विपक्ष जमीन पर काम न कर केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित रहा तो बीजेपी की जीत की राह आसान हो जाएगी।
बंगाल से सबक लेकर विपक्ष पहले अपने वोटरों के नाम समय पर फार्म भर कर दर्ज करा ले,अन्यथा एस आई आर के नाम पर यहां भी चुनाव जीतने का खेला भाजपा कर सकती है।





