जिपं सदस्यों के बयान एक कौड़ी कीमत के भी नहीं: चीफ जस्टिस
नैनीताल।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान 14 अगस्त को नैनीताल में हुए बवाल को लेकर उच्च न्यायालय में आज सुनवाई हुई,जिसमे एसएसपी को हटाने को न्यायालय ने बार बार दोहराया और कहा कि कैसे समाज आप बनना चाहते है। मुख्य न्यायाधीश के इस बात से सरकार की गंभीर संकट में है।। यह सारा मामला सरेआम अपहरण से शुरू हुआ, और सारा मामला “अपनी मर्जी से घूमने” जाने तक पहुंचा कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की गयी पर अभी तो कम से कम ऐसा हुआ प्रतीत नहीं होता है।
आज की सुनवाई में कानून व्यवस्था की दुर्दशा को लेकर उच्च न्यायालय ने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा को बुरे तरीके से लताड़ लगाई। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र ने पूरी सुनवाई के दौरान कम से कम तीन बार प्रहलाद नारायण मीणा का एसएसपी पद से तबादला करने को कहा।
सुनवाई की लगभग शुरुआत में ही मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र ने कहा कि उचित यही होगा कि एसएसपी का तबादला कर दिया जाए, वो बुरे तरीके से विफल हो चुके हैं।
दूसरे मौके पर सरकारी वकील ने कहा कि ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों को हटा दिया गया है। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लापरवाही तो इनसे (एसएसपी से) ही शुरू हुई।
मुख्य न्यायाधीश ने एसएसपी से पूछा कि इस गैंग के आने को लेकर आपके पास इंटेलिजेंस था या नहीं।
तो एसएसपी ने सवाल का जवाब देने के बजाय कह दिया कि कोई गैंग नहीं था।
इस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र ने नाराजगी भरे स्वर में कहा – कोई गैंग नहीं था- से आपका क्या मतलब है? क्या हम अंधे हैं ? आपकी राय में उनको क्या कहते हैं- व्यक्तियों का जमावड़ा ?
एसएसपी के कुछ जवाब देने पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह साफ दिख रहा है कि हर कोई रेनकोट के अंदर तलवार लिए हुए है।
एसएसपी ने कहा कि हमने इन लोगों की शिनाख्त कर ली है.
इस पर फिर तीखे स्वर में में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र ने पूछा- तो फिर आपने क्या किया, उनको पुष्पगुच्छ दिये ?
अदालत की कार्यवाही के आगे बढ़ने पर मुख्य न्यायाधीश ने एडवोकेट जनरल से पूछा कि आप क्या चाहते हैं- यह संस्कृति बढ़े या फिर आप समाज में शांति चाहते हैं ?
एडवोकेट जनरल ने कहा कि वे शांति चाहते हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश तपाक से बोले – तो पहली चीज यह है कि आप अपनी सरकार से कहिए कि एसएसपी का तबादला करें।
एडवोकेट जनरल ने जब निवेदन करते हुए कहा कि यह काफी कठोर हो जाएगा तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिस तरह से चीजें हुई हैं, उससे हम खुश नहीं हैं।
पांच जिला पंचायत सदस्यों के सरेआम अपहरण से यह सारा मामला शुरू हुआ था. बाद में उनका वीडियो सामने आया कि वे “अपनी मर्जी से घूमने” गए हैं। आज उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान बताया गया कि वे पांचों न्यायालय में उपस्थित हो गए हैं। इस पर भी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र की टिप्पणी गौरतलब है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा- हम उनकी कहानी नहीं सुनना चाहते हैं., उनकी कहानियों को मोल एक कौड़ी भी नहीं है (their stories are not worth a penny), वे तो अपना खंडन खुद ही कर चुके हैं।
मुख्य न्यायाधीश की इस टिप्पणी से साफ है कि “अपनी मर्जी से घूमने” जाने की कहानी की हकीकत को सभी समझ रहे हैं.
मामले में सुनवाई कल भी जारी रहेगी।





