भूवैज्ञानिकों के दल ने किया धराली क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण
उत्तरकाशी।।
भूतत्व एवम खनिकर्म निदेशालय उत्तराखंड के एक उच्च स्तरीय दल द्वारा आपदाग्रस्त धराली का स्थलीय निरीक्षण किया गया। संयुक्त निदेशक खनन गढ़वाल जीडी प्रसाद के नेतृत्व में धराली पंहुचे दल ने हर्षिल के निकट बनी झील के पानी की सुरक्षित निकासी के उपायों का भी अध्धयन किया। दल ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में भूगर्भीय हलचलों का भी परीक्षण किया।
सचिव खनन के निर्देशन पर उत्तराखंड शासन, औधोगिक विकास विभाग द्वारा गठित भूवैज्ञानिक दल द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्र धराली-हर्षिल में क्षेत्रीय भ्रमण किया गया। भूवैज्ञानिक दल द्वारा दिनांक 05 अगस्त 2025 को ग्राम धराली आपदाग्रस्त का भूगर्भीय निरीक्षण करते हुए सम्भावित खतरे एंव बचाव हेतु उपाय का अध्ययन किया गया।
दल द्वारा हर्षिल में विशेष रूप से नगर के सामने ऊपरी हिस्से में और सेना शिविर के पास एक स्थानीय धारा (गदेरा) तेलगाड़ तीव्र वर्षा के कारण सक्रिय हो गई। इस गदेरे में बड़ी मात्रा में मलबा और पानी आकर भागीरथी नदी के संगम पर जमा हो गया और एक बड़ा जलोढ़ पंख बना दिया। इस पंख ने भागीरथी नदी के मूल चैनल को बाधित कर दिया और नदी के दाहिने किनारे पर एक अस्थायी झील का निर्माण किया। इस नई बनी झील की लंबाई लगभग 1,500 मीटर थी और इसकी अनुमानित गहराई 12 से 15 फीट थी। जलभराव ने न केवल राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से और एक हेलीपैड को डुबो दिया, बल्कि हर्षिल नगर को भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया, जिससे नगर की जमीन के तल का क्षरण हो रहा था। इस घटना ने भागीरथी नदी के स्थलाकृति को काफी बदल दिया। पहले दाहिने किनारे पर स्थित रेत का टीला कट किया गया, जबकि कटे हुए रेत के टीले के विपरीत बाईं ओर ताजा अवसाद जमा हो गया, जिससे हर्षिल नगर का उत्तरी भाग उजागर हो गया। इस क्षेत्र में निरंतर तल का क्षरण पहले से ही आंशिक संरचनात्मक क्षति का कारण बन चुका था, जिसमें जीएमवीएन गेस्ट हाउस के एक हिस्से की हानि शामिल थी।
उक्त कार्य योजना में भूतत्व एंव खनिकर्म निदेशालय, उत्तराखण्ड के भूवैज्ञानिक दल में जी0डी0 प्रसाद, संयुक्त निदेशक, रवि नेगी, सहायक भूवैज्ञानिक, 
प्रदीप कुमार, सहायक भूवैज्ञानिक , स्वप्निल मुयाल पुलिस क्षेत्राधिकारी व उनके एस0डी0आर0एफ0 दल तथा सिंचाई विभाग उत्तरकाशी के अधिकारी/कर्मचारी द्वारा उक्त कार्ययोजना को धरातल पर संपादित किया ।





