राहुल का कार्यक्रम रद्द होने के मिले जुले इफेक्ट्स
★राहुल गांधी के दौरा रद्द होने से भाजपा को फौरी राहत★
★मोहम्मद दीपक के मसले पर कांग्रेसी भी राहत में★
*अनिल बहुगुणा*
पौड़ी। नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की उत्तराखण्ड यात्रा में मौसम बाधा बना तो भाजपा ने राहत की सांस ली। राहुल गांधी की इस उत्तरखण्ड यात्रा को लेकर जहाँ कांग्रेस संजीवनी मिलने की उम्मीद में थी वहीं सत्तादल भाजपा बैचेन दिख रही थी। इस दौरे के टलने से भाजपा को तात्कालिक रूप से राहत जरूर मिली है।
राहुल गांधी का यह 4 और 5 जून का उत्तराखंड दौरा कई मायनों में अहम था, सैनिक और अग्निवीर मुद्दे पर भाजपा को घेराबंदी कर राहुल गांधी सैनिकों के साथ इन मुद्दों पर अवश्य चर्चा करते।
राहुल गांधी का पौड़ी गढ़वाल में पूर्व सैनिकों के साथ संवाद का एक बड़ा कार्यक्रम था। उत्तराखंड को ‘सैनिक बाहुल्य प्रदेश’ कहा जाता है, जहां सेना और अग्निवीर योजना एक बेहद संवेदनशील और बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। राहुल गांधी इस दौरे के जरिए केंद्र सरकार की ‘अग्निवीर योजना’ और सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर राज्य सरकार और भाजपा को सीधे घेरने वाले थे। दौरा रद्द होने से भाजपा इस तीखे हमले से फिलहाल बच गई है।
राहुल गांधी कोटद्वार में दीपक कुमार नाम के एक युवक के जिम भी जाने वाले थे, जिसे लेकर भाजपा पहले से ही हमलावर थी और इसे ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ से जोड़ रही थी। हालांकि कांग्रेस का एक बड़ा गुट कोटद्वार में मोहमम्द दीपक के यहाँ राहुल के जाने से ऐतराज़ जताता आ रहा था। हिन्दू बाहुल्य राज्य उत्तराखण्ड में भाजपा इस मुद्दे को हाथोंहाथ लपक लेती जैसे उन दोनों की मुलाक़ात दिल्ली में हुई तो भाजपा ने राज्य में मुस्लिम परस्त होने का आरोप लगा कर कोहराम मचा दिया था। राहुल गांधी का यह दौरा जमीन पर उतरता, तो स्थानीय मुद्दों और युवाओं के रोजगार को लेकर कांग्रेस को बड़ा माहौल बनाने का मौका मिलता। अल्मोड़ा में होने वाली ‘परिवर्तन का शंखनाद’ रैली और देहरादून में कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक के जरिए कांग्रेस अपने कैडर में नई जान फूंकने की कोशिश में थी। हालांकि राहुल गांधी ने अल्मोड़ा की जनता को फोन से संबोधित किया, लेकिन जो असर जमीनी मौजूदगी का होता है, वह फोन कॉल से नहीं मिल पाता।
राहुल गांधी ने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो और संदेश जारी कर साफ कर दिया है कि वे जल्द ही दोबारा उत्तराखंड आएंगे और इस बार “पूरा समय निकालकर” मिलेंगे। यानी कांग्रेस ने इस मुद्दे को पूरी तरह छोड़ा नहीं है, बस कुछ समय के लिए यह टल गया है। भाजपा को तात्कालिक रूप से राहत जरूर मिली है, लेकिन उसे पता है कि विपक्ष की यह चुनौती जल्द ही दोबारा उसके सामने खड़ी होगी।





