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मां गंगा की गोद में मिलती है अलौकिक शांति: नितिन नबीन

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पौड़ी।।

गढ़वाल जिले के यमकेश्वर तहसील के अंतर्गत हिमालय की पावन गोद में स्थित परमार्थ निकेतन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने गंगा अभिषेक किया। यहाँ उन्होंने संतों के पावन सान्निध्य एवं भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की दिव्य गरिमा के दर्शन किये।
इस गरिमामयी अवसर पर उत्तराखण्ड के  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखण्ड भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट , कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, भाजपा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा उत्तराखण्ड, मदन कौशिक , उच्च शिक्षा मंत्री, उत्तराखण्ड सरकार, डॉ धनसिंह रावत , कैबिनेट मंत्री, उपाध्यक्ष योजना आयोग, उत्तराखंड़, विनय रोहेल्ला, विधायक, यमकेश्वर, रेणु बिष्ट सहित अनेक गणमान्य अतिथियों एवं विशिष्ट विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस पावन अवसर पर राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, पर्यावरण संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर सार्थक चिंतन हुआ।
परमार्थ निकेतन में हुआ यह संत समागम भारत की उस सनातन चेतना का जीवंत प्रतीक है, जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ के दिव्य आदर्शों का प्रतीक है।
इस पावन अवसर पर आचार्य महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज, योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव महाराज, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज, आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी कैलाशानन्द महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवीन्द्र पुरी महाराज, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती , बालकृष्ण , महामण्डलेश्वर पूज्य स्वामी दयाराम दास महाराज, पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
परमार्थ निकेतन के परम पावन वातावरण में उपस्थित सभी पूज्य संतों ने भारत की सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और राष्ट्र निर्माण संतों ने कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ऋषियों, मुनियों, तपस्वियों और महापुरुषों की तपोभूमि है। यह वह भूमि है जहाँ आध्यात्मिकता और राष्ट्रभाव एक-दूसरे के पूरक हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी, नितिन नवीन  ने कहा कि हम लोग गंगा के तट वाले लोग हैं। गंगा मैया व छठी मैया का साथ है। गंगा के तट पर आते हैं तो अपने आप मन शांत हो जाता है, शुद्धता आ जाती है, और आप सबका साथ मिले तो निश्चित रूप से हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है।उन्होंने कहा कि संत सनातन परम्पराओं को हजारों वर्षों से आगे बढ़ा रहे हैं, यह अद्भुत है। संतों ने ही भारत को कई बार विपरीत परिस्थितियों में भी दिशा दी है। संतों की परम्परा, तप की परम्परा के साथ भारतीय संस्कृति को जीवंत रखा है। जब तक गंगा की धारा प्रवाहित होती रहेगी, तब तक भारत में भारतीय संस्कृति, परम्पराएँ व संतों का आशीर्वाद प्राप्त होता रहेगा।

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