दुःखद: पहले दिन ही केदारधाम यात्रा में गुजरात के श्रद्धालु की मौत
●मृतक के बेटे को स्वयं सीएम धामी से करनी पड़ी बात●
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही केदारनाथ में एक तीर्थ यात्री को समय पर इलाज़ न मिलने स मौत हो गई। मृतक के बेटे को अपने पिता का शव बेस तक ले जाने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ी। मरीज को यथासमय मेडिकल सहायता नहीं मिल पाई और उसकी मौत हो गई।
कपाट खुलने के पहले दिन गुजरात से दर्शन करने आए एक श्रद्धालु की हार्ट अटैक से मौत के बाद उनके परिजनों को शव को नीचे ले जाने के लिए घंटों तक परेशान होना पड़ा। मृतक के बेटे ने प्रशासन पर लापरवाही और संवेदनहीनता के आरोप लगाए हैं।जानकारी के अनुसार गुजरात के बड़ौदा निवासी टूर आपरेटर अंकुर कुमार अपने माता-पिता के साथ केदारनाथ दर्शन के लिए आए थे। अंकुर कुमार के अनुसार उनके पिता को अचानक हार्ट संबंधी समस्या हुई और वह गिर पड़े। इसके बाद उन्होंने तुरंत 100 नंबर पर फोन कर मदद मांगी। उन्हें आश्वासन दिया गया कि टीम 5 से 10 मिनट में पहुंच जाएगी, लेकिन करीब डेढ़ घंटे तक कोई सहायता नहीं पहुंची। अंकुर ने सीएम धामी से भी बात की। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
अंकुर का आरोप है कि अंततः उन्हें खुद ही अपने पिता को पिठू पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतक के बेटे ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता का शव करीब दो घंटे तक हेलीपैड पर धूप में पड़ा रहा। उसका कहना है कि प्रशासन ने शव को हेलीकॉप्टर से नीचे भेजने में असमर्थता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अन्य कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध हो सकता है तो मृत श्रद्धालु के शव को सम्मानपूर्वक ले जाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
अंकुर कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने रुद्रप्रयाग प्रशासन से मदद मांगी तो उन्हें एंबुलेंस का नंबर दिया गया। उनका कहना है कि एंबुलेंस संचालक ने शव को दिल्ली एयरपोर्ट तक ले जाने के लिए 16 हजार रुपये की मांग की।
वहीं उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूकाडा) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि जैसे ही ये सूचना मिली उन्होंने तत्काल शव को बेस तक पहुँचाने का की ब्यवस्था की इसमें भले ही कुछ वक्त लग गया।





