#उत्तराखण्ड #देहरादून #हरिद्वार

सूचना आयुक्त का बड़ा फैसला, हरिद्वार जमीन घोटाले की रिपोर्ट सार्वजनिक

Share Now

 

★सूचना आयुक्त कुशलानंद ने दिया आदेश★

देहरादून। हरिद्वार नगर निगम के ग्राम सराय में निगम के कार्यों के लिए 2.370 हेक्टेयर भूमि की खरीद प्रक्रिया में गंभीर घोटाला हुआ था। यह बात अब स्पष्ट हो चुकी है। इस मामले में एक IAS अधिकारी जो कि उस समय DM थे साथ ही नगर आयुक्त को निलंबित करना पड़ गया था। मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण की जांच के लिए सचिव रणवीर सिंह चौहान को जांच अधिकारी नियुक्त किया था। शासन के निर्देशों पर जांच अधिकारी सचिव रणवीर सिंह चौहान ने जून 2025 में 29 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी। रमेश चंद्र शर्मा RTI में 2 जून 2025 को शहरी विकास विभाग से जांच कार्रवाई की पूरी पत्रावली मांगी थी।
उन्होंने शासन को हुए कुल वित्तीय राजस्व नुकसान और उसकी वसूली संबंधी सूचनाएं भी मांगी थीं। शासन के लोक सूचना अधिकारी ने सूचना देने से इन्कार कर दिया था। उनका तर्क था कि इससे जांच तो प्रभावित हो ही सकती है। साक्ष्य के तौर पर जिन गवाहोंं के बयान लिए गए हैं उनके लिए भी असुरक्षा की स्थिति बनेगी।
द्वितीय अपील पर आयुक्त ने की टिप्पणी
शासन से मिले जवाब पर रमेश चंद्र शर्मा ने 2 जुलाई 2025 को प्रथम अपील दायर की। प्रथम अपील के निस्तारण से असंतुष्ट होकर उन्होंने 24 नवंबर 2025 को सूचना आयोग में द्वितीय अपील दाखिल की। आयोग में इस प्रकरण पर चार सुनवाई हुईं, जिसकी अंतिम सुनवाई 26 मई 2026 को हुई। अंतिम निस्तारण करते हुए सूचना आयुक्त कुशलानंद ने टिप्पणी की कि सूचना का अधिकार अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस तक सूचना पहुंचाना है। इसका लक्ष्य नागरिकों को लोक प्राधिकारियों के नियंत्रण में उपलब्ध सूचनाएं प्राप्त करने में मदद करना है।
शासन के तर्क का खंडन कर आरटीआई कार्यकर्ता का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान रमेश चंद्र शर्मा ने शासन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि पूर्व में एक्यूरेट मीटर घोटाला प्रकरण में विभागीय जांच पूरी होने के बाद जांच पत्रावली उपलब्ध कराई गई थी। इसलिए इस मामले में भी सूचना रोके जाने का कोई औचित्य नहीं है। सूचना आयुक्त ने शासन से स्पष्टीकरण मांगा था कि सूचनाएं सार्वजनिक होने से जांच, अभियोजन या गिरफ्तारी कैसे प्रभावित हो सकती है। शासन की ओर से छह अप्रैल 2026 को दिए गए स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए सूचना आयुक्त ने 26 मई 2026 को अंतिम आदेश जारी किया। इसमें आयोग के आदेश में शहरी विकास शासन को निर्देश दिया गया है। उन्हें जांच आख्या में दर्ज बयानों को अलग करते हुए अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध करानी है। इसके साथ ही जांच आख्या में दर्ज राजस्व हानि संबंधी अनुमानित विवरण का पूरा रिकॉर्ड भी देना होगा। राजस्व वसूली की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी अपीलकर्ता को लिखित रूप में देनी होगी। यह सभी सूचनाएं आदेश प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर उपलब्ध करानी होंगी।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *