#देहरादून

पैट्रिक पर गाज़ गिरते ही खनन की कमान अब राजपाल लेघा के हाथों में

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हिम् तुंग वाणी
सूबे में राजस्व उगाही के सबसे बड़े महकमों में से एक खनन विभाग की कमान अब राजपाल लेघा के हाथ में आ गयी है। विभाग में होनहार अफसर माने जाने वाले लेघा को कार्यवाहक निदेशक के दायित्यों के निर्वहन सम्बन्धी आदेश शासन द्वारा जारी कर दिया गया है। सुरेश लॉरेंस पैट्रिक को निलंबित करने के महज़ 30 घण्टे बाद शासन ने इस महत्वपूर्ण विभाग की बागडोर योजना के मुताबिक राजपाल को सौंप दी है। ग़ौरतलब है कि यदि लेघा को पूर्णकालिक डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति मिलती है तो वह करीब डेढ़ दशक से अधिक समय तक इस सूबे में खनिजों के दोहन उन्ही के निर्देशन में सम्पन्न होगा।
महज़ 15 वर्ष पूर्व खान अधिकारी के पद से इस महकमें में अपनी पारी शुरू करने वाले खान अभ्यांत्रिकी स्नातक राजपाल लेघा ने आज इस महकमें के मुखिया पद तक का सफर तय कर लिया है। विभागीय ही नहीं बल्कि अनेक निजी मामलों में विवादास्पद रहे सुरेश लॉरेंस पैट्रिक पर मुख्यमंत्री की वक्र दृष्टि पड़ते ही अपर निदेशक लेघा को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गयी।
लेघा की कार्यकुशलता का ही नतीजा है कि उनके कांधे पर महज़ 15 वर्ष में सरकार द्वारा एक जिलास्तरीय खान अधिकारी से निदेशक स्तर तक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का बोझ दे दिया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023-24 में विभाग के लिए 850 करोड़ की राजस्व उगाही का टार्गेट बजट में सरकार द्वारा रखा गया था जिसके सापेक्ष मात्र 635 करोड़ ही विभाग जुटा पाया। यह आंकड़ा तस्दीक कर रहा है कि सुरेश लॉरेंस पैट्रिक विभागीय आकांक्षाओं पर अपेक्षित रूप से खरे नहीं उतर पाए थे। अब नए वित्तीय वर्ष में सरकार जो भी लक्ष्य भूतत्व व खनिकर्म विभाग के लिए तय करेगी उसके विरुद्ध विभाग अतिरिक्त राजस्व संग्रह शाही खजाने में जमा करेगा,नए कार्यवाहक डायरेक्टर की क्षमताओं के लिए यह एक लिटमस टेस्ट की तरह होगा।
वहीं, युवा निदेशक से सरकार की यह भी उम्मीदें होंगी कि वह विवादों से चोली दामन का रिश्ता रखने वाले इस महकमें के चेहरे पर लगे दागों को भी साफ करेंगे। ज़ाहिर है कि नए कार्यवाहक डायरेक्टर को एक लंबी अवधि तक इस जिम्मेदारी का निर्वहन करना है अतः वह भी

नूतन विशेषांक: व्यंग

चाहेंगे कि सुरेश लॉरेंस पैट्रिक जैसे इतिहास की पुनरावृत्ति न हो। उम्मीद की जा सकती है कि यह महकमा अब एक नए कलेवर के साथ प्रदेश के राजस्व में वृद्धि व भूगर्भीय चिंताओं का निराकरण करेगा।

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