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पालिकाओं में भ्रष्टाचार पर हाईकोर्ट हुआ सख्त, नैनीताल अध्यक्ष को हटाया

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नैनीताल पालिकाध्यक्ष को उच्च न्यायालय द्वारा बर्खास्त किए जाने के बाद पद्रेशभर में भ्रष्टाचार में लिप्त पालिकाओं में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि प्रदेशभर मेें अधिकांश नगर पालिका व पंचायतो में भ्रष्टाचार को लेकर लोगों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। अनेक नगर पालिकाओं के भ्रष्टाचार संबंधी मामले पूर्व से ही न्यायालय में विचाराधीन हैं।
नैनीताल के बाबत लिए गए न्यायालय के निर्णय के बाद अन्य पालिकाओं से संबंधित दर्ज भ्रष्टाचार के मामलों में भी कठोर निर्णय लिए जाने के अंदेशे के बाद हड़कंप मचा हुआ है।
नैनीताल। उत्तराखण्ड हाईकोर्ट के एक फैसले से विवाद में चल रही पालिकाओं को सकते में ला दिया हैं। उच्च न्यायालय ने नैनीताल नगर पालिका अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी की मुसीबतें बढा दी है । नैनीताल नगर पालिका में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता संबंधी एक मामले में पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की प्रशासनिक व वित्तीय शक्तियां सीज कर दी गयी। जबकि अधिशासी अधिकारी आलोक उनियाल को निलंबित कर दिया है।
गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष गर्ग के अनुसार न्यायालय में पिछले दिनों काशीपुर निवासी ठेकेदार कृष्णपाल ने तीन रिट याचिका दाखिल कर न्यायालय से कहा था कि उनके निविदाएं को नन्दा देवी और दुर्गा पूजा महोत्सव से इरादतन बाहर किया गया। इसमें और नगर पालिका ने नियमों का उल्लंघन कर रमेश सिंह सजवाण को ठेका दे दिया था। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे स्वतः संज्ञान पीआईएल के रूप में ले लिया था।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने नैनीताल नगर पालिका में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता को देखते ईओ आलोक उनियाल को निलंबित कर दिया है। खंडपीठ ने पालिका अध्यक्ष सचिन नेगी की प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों को सीज करते हुए सरकार से नगर पालिका के एकाउंट की जांच करने को कहा है। और पूर्व जस्टिस इरशाद हुसैन की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर मामले की जांच करने के भी निर्देश जारी किए हैं। गौरतलब है कि गठित कमेटी की जांच में कई अन्य मामले भी सामने आ सकते हैं।

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