गांव की गिरती स्वीकार्यता और उत्तराखंड का खोता आत्मबोध, आलेख:रतन असवाल
रतन असवाल (प्रबंध संपादक) उत्तराखंड राज्य को बने पच्चीस वर्ष हो चुके हैं। संघर्ष, आंदोलन और बलिदान की भूमि से जन्मा यह प्रदेश केवल 13 जिलों के लिए अलग से प्रशासनिक इकाई बनाना नहीं था, बल्कि यहाँ के गांव, जंगल और एक सुंदर जनजीवन की रक्षा करने की पुकार थी। आज जब यह प्रदेश एक […]



