#उत्तराखण्ड

क्या राहुल गांधी के दौरों से मन बदल सकेंगे पहाड़ी मतदाता..!

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 *अनिल बहुगुणा*

पौड़ी।

भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे को 2027 का राजनीतिक बिगुल के तौर पर देखा गया वहीँ अब राहुल गांधी के पौड़ी अल्मोड़ा और देहरादून दौरे को भी कांग्रेस का चुनावी शंखनाद मान कर देखा जा रहा है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे के लिए पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा का चयन करना कांग्रेस की एक सोची-समझी और गहरी चुनावी रणनीति मानी जा रहा है। उत्तराखंड की राजनीति पारंपरिक रूप से दो मुख्य क्षेत्रों (मंडलों) में बंटी हुई है,गढ़वाल और कुमाऊं। पौड़ी को गढ़वाल का और अल्मोड़ा को कुमाऊं का राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र माना जाता रहा है।
​2027 के विधानसभा चुनाव के लिहाज से इन दोनों जगहों को चुनने के पीछे छिपे रणनीतिक कारणों और इससे होने वाले फायदों को देख कर
​राहुल की जनसभा और पूर्व सैनिकों से तक़रीर करने के लिए इन जगहों को तय करने के पीछे
​दोनों मंडलों में राजनीतिक संतुलन प्रमुख वजह है। पौड़ी गढ़वाल मंडल का केंद्र बिंदु है, जबकि अल्मोड़ा कुमाऊं मंडल का अल्मोड़ा सांस्कृतिक और राजनैतिक हार्ट है। इन दोनों जगहों को चुनकर कांग्रेस ने दोनों क्षेत्रों के मतदाताओं को एक साथ साधने और यह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि कांग्रेस पार्टी किसी एक क्षेत्र विशेष की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की के लिए काम करना चाहती है।
​पौड़ी गढ़वाल की श्रीनगर सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गणेश गोदियाल का प्रभाव क्षेत्र रहा है, जिन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को अच्छी टक्कर दी थी। वहीं, अल्मोड़ा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदीप टम्टा जैसे बड़े कांग्रेसी चेहरों का गृह क्षेत्र है। राहुल गांधी का यहाँ आना स्थानीय कैडर में नई जान फूंकने और गुटबाजी को कम करने की कोशिश है। पिछले कुछ चुनावों में देखा गया है कि मैदानी सीटों (जैसे हरिद्वार, उधमसिंह नगर, देहरादून के कुछ हिस्से) में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में भाजपा की जड़े मजबूत और गहरी रही है। पौड़ी और अल्मोड़ा पूरी तरह से पहाड़ी जिले हैं। यहाँ सभाएं करके राहुल गांधी सीधे तौर पर ‘पहाड़ की आवाज’ बनने का नैरेटिव सेट करना चाहते हैं।
​2027 के चुनाव में बहुमत (36 सीटें) हासिल करने के लिए कांग्रेस को पहाड़ी सीटों पर बड़ी वापसी करनी ही पड़ेगी नहीं तो राजनीति कांग्रेस के पक्ष में होना कठिन होगा। राहुल गांधी को इन केंद्रों से शुरुआत करने के कई राजनैतिक फायदे भी हो सकते है। स्थानीय और सुलगते मुद्दों को धार देने के लिए कोशिश की जायेगी।
​पहाड़ के इन दोनों जिलों में कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो सीधे जनता की भावनाओं से जुड़े हैं। इन मंचों से कांग्रेस इन मुद्दों को राज्य स्तर पर बड़ा बना सकती है,​अग्निवीर योजना को लेकर पौड़ी और अल्मोड़ा दोनों ही इलाके संवेदनशील है। ये सैन्य बाहुल्य क्षेत्र हैं, जहाँ के युवा बड़ी संख्या में सेना में जाते हैं। अग्निवीर योजना को लेकर यहाँ के युवाओं में जो असंतोष है, राहुल गांधी उसे भुनाकर युवाओं को कांग्रेस की तरफ आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।
​ पौड़ी अंकिता भंडारी हत्यकांड के मामले का मुख्य केंद्र रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे को यहाँ उठाकर कांग्रेस महिला सुरक्षा और स्थानीय अस्मिता के नाम पर सरकार को घेर सकती है जिसका असर पूरे राज्य की महिला वोट बैंक पर पड़ेगा। इन्हीं दोनों पहाड़ी जिलों से सबसे ज्यादा पलायन हुआ है। रोजगार और पहाड़ी खेती-सैलानियों की बदहाली पर बात करना सीधा स्थानीय लोगों से जुड़ने का मौका देता है। राहुल गांधी इसको भी टच कर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस राहुल गांधी के इस दौरे से
​पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा केवल दो जिलों को साधने के साथ ही भौगोलिक रूप से कई अन्य विधानसभा सीटों पर भी असर डाल सकते है।
​पौड़ी से चमोली, रुद्रप्रयाग, और टिहरी की सीटों को प्रभावित किया जा सकता है, जबकि
​अल्मोड़ा से बागेश्वर, पिथौरागढ़, और चम्पावत जैसे सीमांत जिलों की सीटों पर सीधा संदेश भेजने की कोशिश होगी।
एक जगह पर बड़ी जनसभा करने से आसपास की कम से कम 15-20 सीटों के कार्यकर्ताओं और मतदाताओं में सीधा संदेश भेजने की कोशिश होगी। राहुल गांधी के पहाड़ी जिलों में होने वाली सभा के जरिये संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं में जोश भरने का भी प्रयास किया जायेगा।
​उत्तराखंड में लगातार हार के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जो शिथिलता आई है, उसे दूर करने के लिए राहुल गांधी का चेहरा सबसे बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है।
​राहुल गांधी द्वारा पौड़ी और अल्मोड़ा को अपनी सभाओं के लिए चुनना भाजपा के “धामी मॉडल” को सीधे चुनौती देना है। यह कदम कांग्रेस के लिए खोई हुई ‘पहाड़ी जमीन’ को वापस पाने और 2027 की लड़ाई को पूरी तरह से ‘पहाड़ के बुनियादी मुद्दों’ पर केंद्रित करने का एक मजबूत दांव है।

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