पौड़ी: सिटिंग विधायक को चुनौती देते भाजपा के अन्य दावेदार
अजय रावत अजेय
धामी सरकार के 4 साल पूरे होने के साथ ही 2027 के चुनाव की आहट आने लगी है। तमाम सीटों पर संभावित दावेदार अपने लिए फील्डिंग सजाने लगे हैं। पौड़ी विस् सीट पर सिटिंग विधायक भाजपा का होने के बावजूद अन्य दावेदार भी पूरी उम्मीद के साथ स्वयं को जनता व पार्टी हाई कमान के सामने प्रस्तुत करने लगे हैं।
गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी की अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित विस् सीट के जरिये 2027 में विस् पंहुचने के लिए मौजूदा विधायक राजकुमार पौरी के साथ अन्य दावेदार भी जोर आजमाइश करने लगे हैं। सिटिंग एमएलए होने के चलते राजकुमार पौरी की दावेदारी स्वाभाविक है, वहीं पूर्व विधायक मुकेश कोली को पूरी उम्मीद है कि संगठन 2027 की रणभूमि में उन्हें ही भगवा सेना का झंडाबरदार घोषित करेगा। आईआईटियन व अभियंता गणेश चन्द्र भी अपनी आधुनिक व प्रगतिशील सोच की बुनियाद को अपनी दावेदारी का मजबूत आधार मान कर 2027 में पौड़ी से कमलवीर बनने की आश लगाए बैठे हैं। वहीं 2022 में भगवा पटका धारण करने वाले पौड़ी में एक जमाने में कांग्रेस के मजबूत स्तंभ रहे कोट ब्लॉक के पूर्व प्रमुख नवल किशोर भी साइलेंट दावेदार के रूप में रेस में बताए जा रहे हैं।
सहज स्वभाव मौजूदा विधायक राजकुमार पौरी सिटिंग एमएलए होने के चलते बेशक दावेदारों की फेहरिस्त में पहले पायदान पर हैं। पूरे विधायक काल के दौरान देहरादून के मोहपाश से मुक्त रहे राजकुमार सीएम धामी की गुड बुक में भी स्थान रखते हैं। इसी का परिणाम है कि उन्हें अपनी विस् की अनेक विकास योजनाओं की स्वीकृति में मुख्यमंत्री का आशीर्वाद भी मिलता रहा है। हालांकि उन पर ऑफिसियल सक्रियता व शासन स्तर पर अपेक्षित संवाद की कमी को अंदरूनी विरोधी लगातार कटाक्ष करते रहे हैं।
पूर्व विधायक मुकेश कोली का 2022 में अप्रत्याशित रूप से टिकट कटने के बाद उनके द्वारा भाजपा संगठन में अपनी उपस्थिति को लगातार मजबूत किया गया। नतीजतन वह लंबे समय तक भाजपा के शेड्यूल कास्ट शैल के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। ज़ाहिर है इस दौरान उन्होंने भाजपा के आलाकमान में अपनी पकड़ को मजबूत किया होगा, जिसका लाभ उन्हें 2027 में प्रत्याशी चयन के दौरान मिल सकता है। वहीं मुकेश गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी कैम्प के सबसे अहम सिपाह सालारों की लिस्ट में भी स्थान रखते हैं और प्रत्याशी चयन में स्थानीय सांसदों की भूमिका काफ़ी मायने रखती है। हालांकि मुकेश कोली पर अपने कार्यकाल के दौरान महत्वाकांक्षी ल्वाली जलाशय के अपेक्षित निर्माण न होने के आरोप भी चस्पा किये जाते रहे हैं।
वहीं, आईआईटी रुड़की से औद्योगिक अभियांत्रिकी में ग्रेजुएट व मिडिल ईस्ट में उल्लेखनीय कार्य करने वाले इंजीनियर गणेश चंद्र भी 2027 के रण में पौड़ी के मोर्चे पर भगवा ध्वजवाहक बनने के लिए प्रयासरत हैं। वर्ष 2021 में भाजपा का दामन थामने वाले पाबौ ब्लॉक के गणेश चंद्र का टेक्नोक्रेट होना, आधुनिक विकास की सोच व प्रगतिशील विचारधारा उनकी दावेदारी के वजन में निश्चित रूप से इजाफा करती है। नित नए प्रयोग करने वाली भाजपा मौजूदा व पूर्व विधायक के अतिरिक्त यदि कोई चौंकाने वाला फैसला करती है तो निश्चित रूप से गणेश चन्द्र 2027 को अपनी टेक्नोक्रेसी के हुनर को इलेक्शन स्ट्रैटजी मे मॉडिफाई करने का मौका मिल सकता है। हालांकि गणेश चन्द्र के साथ स्थानीय जनता व कार्यकर्ताओं के साथ अपेक्षित संवाद न होने का आरोप लगता रहा है।
वहीं, कोट ब्लॉक के पूर्व प्रमुख नवल किशोर हालांकि अपेक्षित रूप से सक्रिय नजर नहीं आते लेकिन वह भी टिकट की चाह में ही भाजपा में जमा हुए थे। कांग्रेस के टिकट पर एक बार विस् का चुनाव लड़ चुके नवल किशोर ने अपेक्षित मत प्राप्त कर अपनी जन स्वीकार्यता को साबित किया था। प्रयोगधर्मी भाजपा उन्हें 2027 में पौड़ी के जंग-ए-मैदान में उतार दे तो इसमें कोई आश्चर्य न होगा। हालांकि खबर यह भी है कि कांग्रेसी पृष्ठभूमि व हाल के वर्षों में भगवा पटका धारण करने वाले नेताओं को 2027 में प्रत्याशी नहीं बनाया जाएगा, जब तक कि ऐसी परिस्थितियां न बने।
इसके इतर अन्य विकल्प भी भाजपा के समक्ष हैं। जहां विश्लेषकों व सियासी चिंतकों को सोच ठहर जाती है , अनेक बार वहां से भाजपाई मैनेजरों की सोच शुरू होती है ऐसे में पार्टी अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित पौड़ी में किसी महिला को मैदान में उतार सकती है। जिसमें फिलवक्त पूर्व जिपं अध्यक्ष शांति देवी का नाम अहम है। वहीं ऐन केन प्रकारेण चुनाव जीतने की भाजपा लत जो न कराए वह कम ही होता है। ऐसे में पार्टी ऐन वक्त पर किसी जनाधार वाले गैर-भाजपाई अथवा गैर-सियासी नेता को भी आनन फानन में भगवा पटका पहना पौड़ी के मैदान में उतार दे तो भी हैरानी न होगी।





