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..तो पैराग्लाइडिंग व अन्य ऐरो स्पोर्ट्स पर लग जायेगी रोक..!

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★उत्तराखंड और हिमांचल में थम सकते है पैरागलैडिंग और पैरामोटरिंग के एडवेंचर★

*अनिल बहुगुणा*

देहरादून।

महानिदेशक सिविल एविएशन ने स्पोर्ट्स उड़ानों पर  निगाहें सख़्त कर ली है, अब देश के आकाश में स्पोर्ट्स के नाम पर कोई परवाज नहीं भर पायेगा। डीजीसीए के इन निर्णय के बाद देश के एरो स्पोर्ट्स पर भी संकट के बादल मंडराने लगे है और इससे जुड़े कई लोगों के बेरोजगार होने की आशंका हो गई है।
भारत की सिविल एविएशन नियामक संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने हालिया उच्चस्तरीय बैठक में पैराग्लाइडिंग, पैरामोटर और पैरासेलिंग जैसी लोकप्रिय एडवेंचर उड़ानों को गैरकानूनी घोषित मान लिया है, हालांकि अभी DGCA ने इनके लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। DGCA ने इन गतिविधियों के पायलटों को लाइसेंस देने की मौजूदा प्रक्रिया पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है। इस फैसले का सीधा असर न सिर्फ एडवेंचर टूरिज्म पर पड़ेगा, बल्कि देशभर में ग्लाइडर (साइलप्लेन) उड़ानों के भविष्य पर भी सवालिया निशान लग गया है। बैठक में DGCA अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों की कमी, अनियंत्रित ऑपरेशंस और पिछले कुछ वर्षों में हुई दुर्घटनाओं को मुख्य वजह बताया। सूत्रों के मुताबिक, इन गतिविधियों को फिलहाल नेशनल एयर स्पोर्ट्स गाइडलाइंस 2023 के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव पास किया गया है। पायलट लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को भी “अमान्य” करार दिया गया, क्योंकि यह DGCA-अनुमोदित प्रशिक्षकों या परीक्षकों के बिना चल रही थी।यदि ये नियम एविएशन द्वारा जारी होते है तो एडवेंचर टूरिज्म पर भारी असर पड़ सकता है। हिमाचल प्रदेश के बीर-बिलिंग, उत्तराखंड के मुक्तेश्वर-आल्मोड़ा,पौड़ी, गोवा के बीचों और राजस्थान के रणथंबौर जैसे प्रमुख हब्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा। यहां हर साल लाखों पर्यटक पैराग्लाइडिंग और पैरामोटर उड़ानें भरते हैं। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे हजारों पायलटों, प्रशिक्षकों और ऑपरेटर्स की आजीविका पर संकट आ जाएगा। पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के पदाधिकारीयों “हम सुरक्षा के पक्ष में हैं, लेकिन अगर अचानक प्रतिबंध से पूरा उद्योग ठप हो जाएगा। बिर-बिलिंग अकेले में 500 से ज्यादा पायलट काम करते हैं और सालाना 200 करोड़ रुपये का टूरिज्म राजस्व आता है। पैरासेलिंग मुख्य रूप से वाटर स्पोर्ट्स का हिस्सा है, लेकिन अब यह भी हवाई क्षेत्र में आकर DGCA के दायरे में आ गई है। जिससे अब पैरा सेलिंग पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। फिलहाल DGCA का स्पष्ट कहना है कि देश के आकाश में उनकी अनुमति के कोई भी उड़ान नहीं भर पायेगा और एरो स्पोर्ट्स के पायलटों को उनसे अनुमति लेनी ही होगी।
DGCA का यह फैसला सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए बताया जा रहा है। लेकिन इससे एडवेंचर स्पोर्ट्स का तेजी से बढ़ता उद्योग रुक सकता है।

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