अरविंद पांडे की खिचड़ी खाने जा रहे त्रिवेंद्र और बलूनी, तो क्या मचेगी गदर..!
●उत्तराखंड भाजपा में भूकंप, सतह पर आई गुटबाज़ी● ★गदरपुर विधायक के घर पर दिग्गजों का खिचड़ी भोग को जाना, किसको पड़ सकता है भारी★ _
अनिल बहुगुणा_ देहरादून।
उत्तराखंड की राजनीति में आज एक ऐसा तूफान आया है, जिसने पूरी देहरादून की राजनीतिक गलियों को हिला कर रख दिया है। गदरपुर के भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के आवास पर सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के गुरुबार को पहुँचने के कार्यक्रम ने प्रदेश भाजपा में गदर मच दी है। यह दौरा अब सिर्फ एक सामान्य मेलमिलाप नहीं रहा, बल्कि यह पार्टी के भीतर छिपी आग का पहला बड़ा धमाका माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने हाल ही में अरविंद पांडेय पर भूमि के मामले में सख्त कार्रवाई की तैयारी की थी। जांच के नाम पर विधायक को निशाना बनाया जा रहा था, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष अब सतह पर आ गया है। इन दिग्गज नेताओं का एक साथ गदरपुर पहुंचना धामी सरकार के खिलाफ खुली बगावत का संकेत माना जा रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों की तीखी प्रतिक्रिया है कि क्या यह मुख्यमंत्री बदलाव की शुरुआत है? त्रिवेंद्र सिंह रावत और अनिल बलूनी जैसे हेवीवेट नेताओं का एक साथ रहना और अब मदन कोशिक का भी इनके साथ आ जाना नये संकेत दे रहा है, वह भी तब जब देश के गृह मंत्री राज्य में ही है। गदर पुर जाने का कार्यक्रम भी बाकायदा जारी किया गया है। अनुशासित पार्टी में इस तरह का ढीठ पन पहली बार दिखा है। अरविंद पांडेय के घर खिचड़ी संग्राद से हाईकमान को साफ संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि ‘धामी का खेल अब चलने वाला नहीं।
अमित शाह के दौरे के बीच यह ‘चुनौती’ दी जा रही है। अरविंद पांडेय के घर का ये दौरा केंद्रीय नेतृत्व को चुनौती देने जैसा लग रहा है।
इतना तो दिख ही रहा है कि पार्टी में खुली गुटबाजी है। कुमायूँ से लेकर गढ़वाल तक, कई विधायकों में असंतोष पनप रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अब उत्तराखंड में भाजपा के दिये ही भाजपा में आग लगा देंगे। भाजपा के आधिकारिक प्रवक्ता इस को ले कर किसी भी बयान को देने से बच रहे। अरविंद पांडेय के घर जाने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक नहीं है लेकिन वे भी वक़्त को पहचानना अच्छी तरह से जानते है। देखना होगा कि इन नेताओं के उधमनगर पहुँचने के बाद क्या उधम मचाता है।





