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जिपं पौड़ी: साड़ी बीच नारी है कि नारी बीच साड़ी

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पौड़ी। हिम् तुंग वाणी
पौड़ी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के प्रचंड बहुमत से विजयी होने के पश्चात हुई प्रथम बैठक में जहां विपक्षी दलों के सदस्य औपचारिक परिचय तक सीमित रहे वहीं कतिपय भाजपा सदस्यों ने ही इशारों इशारों में विपक्ष की भूमिका निभाने के संकेत दे दिए थे। किंतु इस बैठक के बाद गत दिवस कुछ भाजपाई व कुछ अन्य दलों के सदस्य जिपं में समितियों के गठन के बाबत आपत्ति दर्ज करने न केवल निदेशक पंचायती राज बल्कि पंचायती महकमें के बजीर सतपाल के दर पर भी जा पंहुचे। ऐसे में जिपं में सत्तासीन भाजपा के अंदर यह कहावत सटीक बैठ रही है कि साड़ी बीच नारी है कि नारी बीच साड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक गत दिवस अस्थायी राजधानी देहरादून में जिला पंचायत पौड़ी के आधा दर्जन के करीब सदस्य विरोध दर्ज करने निदेशक पंचायती राज निधि यादव के साथ ही पंचायती राज मंत्री महाराज को ज्ञापन सौंपने पंहुच गए। इस दल में कांग्रेस के जिपं उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी चन्द्र भानु सिंह व भाजपा के जिपं पद के प्रत्याशी रहे महेंद्र सिंह की एक साथ उपस्थिति चौंकाने वाली थी। कड़े अनुशासन का दम्भ भरने वाली भाजपा के लिए यह बेहद असहज होने वाली स्थिति थी। कांग्रेसी चन्द्रभानु सिंह व अन्य सदस्यों का विरोध दर्ज करना स्वाभाविक माना जा सकता है किंतु एक डेढ़ वर्ष पूर्व कांग्रेसी चोला उतार भगवा पटका धारण करने वाले महेंद्र सिंह व उनके साथ एक दो अन्य भाजपाई सदस्यों का इस तरह लिखित विरोध करना भाजपा के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। महंत दिलीप रावत की पत्नी को जहरी वार्ड पर चित्त करने के बाद भगवा चुनरी ओढ़ने वाली ज्योति पटवाल भी महेंद्र सिंह के नक्शे कदम पर कांग्रेसी खेमे वाले इस ज्ञापन दल में शामिल रहीं। जिपं पौड़ी में भाजपा को काबिज़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लैंसडाउन के विधायक दलीप रावत महंत के लिए भी यह एक नई चुनौती मानी जा सकती है, क्योंकि उनकी धर्मपत्नी को चुनावी रण में परास्त करने वाली ज्योति को उन्ही की सहमति व पहल पर भगवा चुनरी ओढ़ने की हरी झंडी मिली थी।
क्योंकि अभी जिपं के गठन को एक महीना भी नहीं हुआ है और इतनी अल्प अवधि में ही सत्तासीन दल के सदस्यों का कांग्रेसी पृष्ठभूमि के सदस्यों से गलबहियां कर यूं विरोध दर्ज करना भाजपा के रणनीतिकारों के लिए नई चुनौती की तरह है। जिस प्रकार से निदेशक पंचायती राज व मंत्री पंचायती राज के समक्ष सौंपे गए ज्ञापन में सदस्यों के नामों का उल्लेख था उससे यह तय कर पाना मुश्किल है कि आखिर यह ज्ञापन भाजपा सदस्यों द्वारा सौंपा गया अथवा कांग्रेस सदस्यों द्वारा..
सियासी परंपराओं की बात करें अथवा पार्टियों के आंतरिक लोकतंत्र के नियमों पर नजर डालें तो ऐसे ज्ञापन प्रायः विपक्षी सदस्यों द्वारा ही दिए जाते हैं, लेकिन इस नई खिचड़ी को पचाने के लिए भाजपा हाई कमान को दिक्कतें आना लाजिमी है।

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