आलाकमान की पसंद दीप्ति 2027 में कर पाएंगी करिश्मा..!
★सरकार में दायित्व के बाद संगठन में महा सचिव बनी दीप्ति कर पायेगी 2027 करिश्मा★

★दिल्ली आलाकमान में बेहत्तर पकड़ रखती है दीप्ति रावत भारद्वाज★
●अनिल बहुगुणा●
भाजपा उत्तराखण्ड की जरनल सेक्रेटरी दीप्ति रावत भारद्वाज ने संगठन की आज जिम्मेदारी संभाल तो ली, लेकिन वे सरकार और संग़ठन के बीच जुगलबंदी को रिदम में ला सकेंगी ये आने वाला समय ही बतायेगा। प्रदेश भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड ने दीप्ती रावत भारद्वाज को पार्टी का स्टेट जनरल सेक्रेटरी बना कर पार्टी में एक अलग से संदेश देने की कोशिश की है। मंगलवार को उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय में विधिवत जिम्मेदारी भी ले ली है, वे उत्तराखण्ड आन्दोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों के स्मारक पर मत्था टेकने भी गई। प्रदेश अध्यक्ष के बाद माह सचिव का पद संग़ठन में खासा महत्वपूर्ण माना जाता है। वैसे राज्य में भाजपा अध्यक्ष को रिपीट किये जाने की मजबूरी हर किसी के गले नहीं उतर पाई थी, इस रिपीटीशन से भाजपा के कुछ छत्रप नाराज तो है पर उनकी नाराजगी सतह पर नहीं आ पाई, क्योंकि भाजपा को एक अनुशासित पार्टी माना जाता रहा है। दिल्ली की छात्र राजनीति से निकल कर आयी दीप्ति रावत को दिल्ली आलाकमान का क्या इशारा है ये तो नहीं पता पर वे संग़ठन में अपनी दमदार हाज़री दे सकती है। वैसे ये भी सुगबुगाहटें है कि भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद कुछ और भी फेरबदल हो सकते है। दीप्ती रावत भारद्वाज पहले भी राज्य में दायित्वधारी रह चुकी है, लेकिन इस बार उनको संग़ठन में भारी भरकम पद से नवाजा जाना कई मायने रखता है। पेशे से खबरनवीस रही दीप्ति को कई और मोर्चों को संभालने का भी जिम्मा दिया गया होगा। राज्य में कोटद्वार की महिला भाजपा विद्यायक ऋतु भूषण संवैधानिक पद पर है और संग़ठन में महामंत्री पद पर भी महिला कार्यकर्ता को बिठाना कोई तो संकेत दे रहा है जो आने वाले समय में स्पष्ट हो पायेगा।
उनकी इस ताजपोशी को महिलाओं को भाजपा के पक्ष में करने की एक बड़ी कोशिश है, जो कि महंगाई और राज्य में महिलाओं अपराधों को देखते हुए भाजपा संग़ठन से खफ़ा रहने लगी थी। और अब फिर से पेपर लीक ने कोड पर खाज कर दी है। दीप्ति अपने इस सांगठानिक कार्यकाल में कितना कर पाती है ये तो वक़्त बता पायेगा लेकिन भाजपा की दो टर्म की सरकार से सत्ता के प्रति लोगों की नाराजगी कैसे दूर हो पायेगी ये संग़ठन के पदाधिकारियों पर भी निर्भर करता है।





