हाइकोर्ट ने डीजीपी और होम सेक्रेटरी को किया तलब
नैनीताल।
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने जिला नैनीताल पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान 5 सदस्यों को ज़बरन उठा कर अपहरण के मामले में डीएम और एसएसपी के शपथ पत्रों में कही गई बातों से संतुष्ट नहीं हुआ और न्यायालय ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव को तलब कर लिया है। जिला पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कथित अपहरण संबंधी स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के साथ 4 अन्य याचिकाओं की सुनवाई हुई। सी.जे.ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इस पूरी घटना में कानून और व्यवस्था को चाक चौबंद रखने पर ध्यान दिया है।मीडिया में न्यायालय की प्रोसिडिंग के वायरल वीडियो पर नाराज होते हुए उन्होंने कहा कि वाइरल करने वालों पर कार्यवाही की जाएगी। कहा कि मीडिया केवल इस न्यायालय से जारी आदेशों को प्रकाशित करे। घटना पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय ने जो करना था, वो ही किया। न्यायालय की तरफ से एक्शन ले लिया गया है। वो यहां ऐसी संस्कृति को नहीं पनपने देंगे। मुख्य न्यायाधीश के तीखे सवालों का जवाब देते हुए एस.एस.पी.ने कहा कि वीडियो में जो दिख रहे हैं उनमें से कोई हिस्ट्री शीटर नहीं है। हम उनकी कुंडली खंगाल रहे हैं। हमने, 14 लोगों को चिन्हित किया है, जिसमें नैनीताल, रामपुर और उधम सिंह नगर जिले के लोग थे। हमने पहचान की है, वो नैपाल में हैं। अपहृत लोगों को रगड़कर ले जाते वीडियो में देखा, लेकिन वो अपने बयान में कुछ और ही कह रहे हैं इसकी भी जांच कर रहे हैं।वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र पाटनी ने कहा कि उन अपहरणकर्ताओं का जोश देखकर लगता है कि पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच कोई सांठगांठ है।
महाधिवक्ता एस.एन.बाबुलकर ने कहा कि एस.एस.पी.ने उच्चाधिकारियों को लिखकर यू.एस.नगर और नैनीताल के बॉर्डर पर सघन चैकिंग करने के लिए लिखा था। ये वही अधिकारी हैं जिन्होंने हल्द्वानी और नैनीताल की घटनाओं को संभाला था और आपने उन्हें इसके लिए सराहा था। इस दौरान उनके साथ सी.एस.सी.चंद्रशेखर सिंह रावत, ए.ए.जी. जी.एस.विर्क आदि रहे।





