उप्र में बिजली के निजीकरण के विरोध में उत्तराखंड के पावर इंजीनियर्स
देहरादून।।
उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के विरोध में उत्तराखंड पॉवर इंजीनियर्स असोसिएशन भी आ गयी है। एसोसिएशन के बैनर तले आज इंजीनियर्स ने देहरादून में प्रदर्शन किया।
उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों में सरकार द्वारा बिजली को निजी हाथों में सौपने की तैयारी है। इसके विरोध में वहां के 27 लाख बिजली कर्मियों ने प्रदर्शन किया , साथ ही आगामी 9 जुलाई को एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की चेतावनी भी दी गयी है। इसी क्रम में आज नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलॉइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर उत्तर प्रदेश में हो रहे निजीकरण का विरोध किया गया। आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे और महासचिव पी रत्नाकर राव ने आरोप लगाया है कि सरकार फर्जी आंकड़े पेश कर पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण करने जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों पर 14400 करोड़ का बिजली राजस्व बकाया है। उन्होंने अंदेशा व्यक्त किया कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश की गरीब जनता वापस लालटेन युग में लौटने को मजबूर होगी।
उत्तराखंड पॉवर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव राहुल चानना के हवाले से एसोसिएशन के मुकेश कुमार ने जानकारी दी कि देहरादून में हुए प्रदर्शन में वरिष्ठ उपाध्यक्ष विवेक राजपूत, जसवंत सिंह, एनएस बिष्ट, उपाध्यक्ष सौरभ पांडे, मोहित डबराल, प्रदीप पंत, बृजेश यादव, सुभाष कुमार, धनजय कुमार, प्रवीण नेगी, अर्चित भट्ट, अनुज राणा, आशीष, विनोद कुमार, आकाश, विवेक चौहान आदि मौजूद थे।





