पांच साल बाद होगी कैलाश-मानसरोवर यात्रा, पंजीकरण शुरू

हिम तुंग वाणी , ब्यूरो
हिन्दुओं के लिए सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थल कैलाश मानसरोवर की यात्रा पांच साल बाद इस वर्ष पुनः शुरू होगी। इसके लिए पंजीकरण भी प्रारम्भ हो गये हैं। इस बार यात्रा की खासियत यह है कि अब तक की 24 दिनों की यात्रा अब सड़क मार्ग से 10 दिन में पूरी होगी।कैलाश मानसरोवर यात्रा हिन्दुओं के लिए ही नहीं कुछ अन्य धर्मों यथा बौद्ध, जैन व बाॅन आदि के लिए भी पवित्र व आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। सन् 2019 में कोविड के कारण भारत सरकार ने यात्रा पर रोक लगा दी थी। इस यात्रा के लिए अब भारत और चीन के बीच पिछले पांच सालोें के लम्बे इन्तजार के बाद सहमति बन गयी है। भारत सरकार के विदेश मन्त्रालय द्वारा संचालित इस यात्रा के लिए पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। अभी यात्रा तिथियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी है लेकिन बताया जा रहा है कि मई से सितम्बर के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रियों के दलों को इस पवित्र यात्रा पर रवाना किया जायेगा। उत्तराखण्ड पर्यटन विभाग द्वारा इसके लिए तैयायरियाँ भी शुरू कर दी गयी हैं।इस यात्रा की खास बात यह है कि इस वर्ष से यात्रियों का यात्रा सफर बहुत ही आरामदायक हो गया है। यात्रियों को अब पूर्व की भाँति यात्रा हेतु पैदल नहीं चलना पड़ेगा। पहले यह यात्रा आठ पड़ावों में 24 दिनों में पूरी होती थी। अब चाइना वार्डर लिपुलेख दर्रे तक सड़क बन जाने के कारण पूरी यात्रा का आनन्द तीन-चार पड़ावों में सड़क मार्ग से ही लिया जा सकता है। अब यह यात्रा 10 दिनों में ही पूरी हो सकती है।यह पहली बार है जब यह यात्रा अपने पुराने परम्परागत मार्ग से शुरू होगी। टनकपुर से पिथौरागढ़ होते हुए यह यात्रा का परम्परागत रूट है। लिपुलेख दर्रे तक भारत सरकार द्वारा सड़क निर्माण किये जाने से यात्री यहाँ से चाइना वार्डर तिब्बत में प्रवेश करेंगे। वहाँ से पहले ही कैलाश मानसरोवर तक सड़क पहुँच चुकी है। इसलिए इस बार यात्रियों के लिए यह यात्रा आरामदायक और सुविधाजन होगी। यात्रा में लगने वाला खर्चा पहले से अधिक हो सकता है। यात्रियों का चयन पूर्व में लाॅटरी सिस्टम से होता था।कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए यात्री के पास अपना वैध पासपोर्ट जो यात्रा तिथि से छ माह बाद तक का हो आवश्यक है। इसके लिए चीनी वीजा के लिए आवेदन करना पड़ेगा। हालांकि इस यात्रा के लिए फिटनेस सार्टिफिकेट आवश्यक नहीं परन्तु तीर्थ यात्री को शारीरिक रूप से दस्तावेज समिट या प्राप्त कर सकता है।